उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में पशुपालकों के लिए भोटिया डॉग सिर्फ एक पालतू कुत्ता नहीं, बल्कि उनके मवेशियों और बकरियों का भरोसेमंद प्रहरी माना जाता है। खासकर चरवाहों और बकरी पालने वाले परिवारों के पास आज भी इन कुत्तों को देखा जा सकता है।
दिन के समय अक्सर ये कुत्ते बेहद शांत नजर आते हैं। धूप में आराम से सोते हुए देखकर ऐसा लगता है कि शायद ये किसी काम के नहीं हैं। लेकिन जैसे ही शाम ढलती है और जंगल की ओर से जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ती है, इनका व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने भोटिया डॉग की इसी बहादुरी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। वीडियो में दो कुत्ते एक तेंदुए को घेरकर उस पर हमला करते नजर आ रहे हैं। दोनों कुत्तों ने तेंदुए को इस तरह दबोच लिया कि देखने वाले भी हैरान रह गए।
हालांकि, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि और स्थान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।पहाड़ों में भोटिया डॉग को लंबे समय से पशुधन की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। रात के समय ये कुत्ते आसपास की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और किसी जंगली जानवर के करीब आने पर भौंककर पशुपालकों को सतर्क कर देते हैं। कई बार ये खुद भी जंगली जानवर का सामना करने से पीछे नहीं हटते।
लेकिन बदलते समय के साथ भोटिया डॉग की पारंपरिक नस्ल और संख्या को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पहाड़ों में पशुपालन और पारंपरिक चरागाहों पर निर्भरता कम होने के कारण ऐसे कुत्तों का पालन भी पहले की तुलना में घटा है।
इसके बावजूद उत्तराखंड के ऊंचे, दुर्गम और बर्फीले इलाकों में आज भी कई पशुपालक इन बहादुर कुत्तों को अपने झुंड के साथ रखते हैं। उनके लिए भोटिया डॉग पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में एक मजबूत साथी और पशुधन का रक्षक है।भोटिया डॉग की कहानी सिर्फ एक कुत्ते की बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पारंपरिक पशुपालन संस्कृति और पहाड़ के इंसान-जंगल के बीच सदियों पुराने रिश्ते की भी झलक दिखाती है।

