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जंगल, नदी-नालों से लेकर आसपास के तमाम इलाकों में ग्रामीण लगातार रेशमा की तलाश कर रहे हैं। कोई पैदल जंगलों में खोजबीन कर रहा है, तो कोई नदी-नालों और संभावित स्थानों पर पहुंचकर जानकारी जुटा रहा है। हर किसी की कोशिश एक ही है कि रेशमा का जल्द से जल्द पता चल सके।
बताया जा रहा है कि रेशमा के मायके पक्ष ने उनकी ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मायके पक्ष की आशंका और संदेह के आधार पर थाने में शिकायत भी दी गई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच का विषय है और मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर बहू-बेटियों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाली कथित मारपीट या प्रताड़ना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी महिला के साथ गलत व्यवहार या प्रताड़ना की शिकायत सामने आती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल गांव की सबसे बड़ी चिंता रेशमा की तलाश है। सर्च अभियान में जिस तरह बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए हैं, वह मुश्किल वक्त में इंसानियत और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश कर रहा है।
ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि रेशमा की तलाश के अभियान को और तेज किया जाए और हर संभावित स्थान पर गंभीरता से खोजबीन की जाए।
पूरे गांव की निगाहें अब एक ही उम्मीद पर टिकी हैं—रेशमा सुरक्षित मिलें और उनके परिवार को जल्द कोई राहत की खबर मिले।
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