टिहरी/चंबा। मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत टिहरी कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में चंबा की सीमा भंडारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से वर्चुअल संवाद किया। इस दौरान नागराजा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की मेहनत, स्थानीय उत्पादों और बढ़ते कारोबार की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने रखी गई।
कार्यक्रम में टिहरी के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने स्थानीय और जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। कलेक्ट्रेट परिसर के साथ-साथ जिले के सभी विकासखंडों में लगाए गए स्टॉलों पर मसाले, अचार, रोजमेरी और अन्य पहाड़ी उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। चंबा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी अपने उत्पादों के माध्यम से स्वरोजगार की तस्वीर प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवाद के दौरान नागराजा स्वयं सहायता समूह की महिला सीमा भंडारी से समूह की गतिविधियों और कारोबार के बारे में जानकारी ली। सीमा भंडारी ने बताया कि समूह में कुल 10 महिलाएं काम कर रही हैं और महिलाएं ऑर्गेनिक आउटलेट के माध्यम से मसाले, रोजमेरी सहित विभिन्न जैविक उत्पाद तैयार कर बाजार तक पहुंचा रही हैं।

नागराजा स्वयं सहायता समूह की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि समूह का वार्षिक कारोबार करीब 9 से 10 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। सीमा भंडारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि समूह से जुड़ी सभी 10 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। पहाड़ की ग्रामीण महिलाओं के लिए यह उपलब्धि आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की एक प्रेरणादायक कहानी है।
मुख्यमंत्री धामी ने चंबा की महिला स्वयं सहायता समूह की इस सफलता की सराहना करते हुए कहा कि टिहरी में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। टिहरी झील और आसपास आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों को बिक्री के लिए बेहतर मंच मिल सकता है, जिससे स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार और महिलाओं को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी पर्यटन से जुड़ी संभावनाओं का लाभ स्वयं सहायता समूहों को मिलना चाहिए। टिहरी बांध और टिहरी झील देखने देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में टिहरी के जैविक उत्पाद और पहाड़ी उत्पाद पर्यटकों तक पहुंचाकर ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को और मजबूत किया जा सकता है।
महिला स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नागराजा समूह की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधनों, मेहनत और सही बाजार के साथ गांव की महिलाएं अपने स्तर पर रोजगार खड़ा कर सकती हैं। लखपति दीदी योजना और स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम माध्यम बन रहे हैं।
कार्यक्रम को लेकर परियोजना प्रबंधक डीआरडीए ज्योति ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से मुख्यमंत्री का सीधा संवाद उनके कार्यों को पहचान देने वाला अवसर है। ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपने स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए बेहतर मंच मिलता है और उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
चंबा की सीमा भंडारी और नागराजा स्वयं सहायता समूह की सफलता अब सिर्फ एक समूह की कहानी नहीं, बल्कि पहाड़ की उन महिलाओं की उम्मीद है जो अपने गांव में रहकर मेहनत के दम पर आगे बढ़ रही हैं। टिहरी के स्थानीय उत्पाद, महिला स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूह मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।
पर्वत पैगाम से शीशपाल रावत।

