टिहरी गढ़वाल से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां समय रहते की गई कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। डोबरा-चाटी झील के पास शनिवार शाम तेज आंधी और तूफान ने अचानक हालात बिगाड़ दिए। झील में बने फ्लोटिंग हटमेंट तेज हवाओं का सामना नहीं कर पाए और देखते ही देखते क्षतिग्रस्त होकर बहने लगे। उस वक्त वहां मौजूद पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए यह पल किसी डरावने सपने से कम नहीं था।
शाम करीब 7:45 बजे आपदा कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि कई लोग झील के बीच फंसे हुए हैं और हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। सूचना मिलते ही SDRF की टीम बिना समय गंवाए कोटी कॉलोनी से घटनास्थल के लिए रवाना हुई। टीम का नेतृत्व SI नरेंद्र राणा कर रहे थे, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर हालात का तुरंत जायजा लिया।
तेज हवाओं और खराब मौसम के बीच SDRF के जवानों ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। एक-एक कर सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कुल 25 से 30 लोगों को पर्यटन विभाग की नावों के जरिए सुरक्षित कोटी कॉलोनी पहुंचाया गया।
अगर समय पर यह कार्रवाई नहीं होती, तो यह घटना जबलपुर के बर्गी डैम जैसे बड़े हादसे का रूप ले सकती थी। लेकिन SDRF की तत्परता और टीमवर्क ने सभी की जान बचा ली।
यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी जरूरी होती है। SDRF के इस साहसिक कार्य की हर तरफ सराहना हो रही है।

